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नेपाल में माओवादियों ने अंतिम बाल सैनिकों को रिहा किया
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08/02/2010
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 | | Nepal | नेपाल सरकार ने भूतपूर्व माओवादी विद्रोहियों की थल सेना के सभी बाल सैनिकों को मुक्त कर दिया है.इस कदम को चीन और भारत के बीच बसे इस निर्धन देश की शांति प्रक्रिया के लिए एक महत्वपूर्ण अध्याय की समाप्ति माना जा रहा है.
मध्य-पश्चिमी नेपाल के बीहड़ मैदानी क्षेत्र में दो सौ से अधिक भूतपूर्व बाल सैनिक बसों में सवार हो कर नेपाल में आम नागरिकों के साथ शामिल होने के लिए रवाना हुए.
बाल सैनिकों के साथ अंतिम चरण में भरती किये गए तीस अन्य माओवादी सैनिक भी वहां से रवाना हुए जो वर्षों के गृह युद्ध के बाद उस हिमालयवर्ती राष्ट्र की पुनर्निर्माण प्रक्रिया में शामिल होंगे.
रोल्पा में हुए इस समारोह में नेपाल में राष्ट्र संघ बाल कोष की प्रतिनिधि गिलियन मेल्सौप भी शामिल थीं. वहां से बोलते हुए उन्होंने वीओए समाचार को बताया कि यह नेपाल की शांति प्रक्रिया के लिए एक "ऐतिहासिक दिवस" है. माओवादी पार्टी के अध्यक्ष, प्रचंड भी इस अवसर पर वहां उपस्थित थे.उन्होंने विदाई भाषण दिया.
नेपाल की सरकार और राष्ट्रसंघ उन भूतपूर्व बाल सैनिकों को,जिनमें लड़कियां भी शामिल हैं, औपचारिक शिक्षा सुविधाएँ, नौकरियों के लिए प्रशिक्षण, स्वास्थ्य कर्मी बनने के लिए प्रशिक्षण, और लघु उद्योग शुरू करने में सहायता करेंगे.
अगले चार महीनों में नेपाल, जन मुक्ति सेना के बचे हुए सभी लड़ाका सैनिकों को राष्ट्रीय सुरक्षा सेना में शामिल करेगा.
अभी भी १९,००० से अधिक ऐसे लड़ाका सैनिक हैं जिन्हें पिछले तीन वर्षों से राष्ट्र संघ के निरीक्षण वाले शिविरों में रहने की अनुमति मिली हुई है. उन्हें प्रशिक्षण जारी रखने की अनुमति है लेकिन उनके अधिकतर अस्त्र राष्ट्र संघ के निरीक्षण में भंडारों में रखे हुए हैं.
इस बारे में नेपाल के राजनीतिक नेताओं के विचार भिन्न हैं की नए संविधान की रूपरेखा तैयार हो जाने के बाद या पहले, भूतपूर्व विद्रोहियों को सेना में शामिल किया जाए या नहीं. कुछ रूढ़िवादी माओवादियों ने धमकी दी है कि यदि संविधान में उनके हितों का ध्यान नहीं रखा जायेगा तो वह फिर से क्रांतिकारी कार्यवाही शुरू कर देंगे.
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